Wednesday, 23 May 2018

Good Morning

*कल शीशा था, सब देख-देख कर जाते थे।*
*आज टूट गया, सब बच-बच कर जाते हैं।*

*समय के साथ,*
*देखने और इस्तेमाल का नजरिया बदल जाता है।*