Good Morning By Art & Painting May 23, 2018 // *कल शीशा था, सब देख-देख कर जाते थे।* *आज टूट गया, सब बच-बच कर जाते हैं।* *समय के साथ,* *देखने और इस्तेमाल का नजरिया बदल जाता है।* Email ThisBlogThis!Share to XShare to Facebook